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IDFC फर्स्ट बैंक फंड घोटाले में IAS अधिकारी प्रदीप डागर गिरफ्तार

IAS अधिकारी प्रदीप डागर को रिटायरमेंट के बाद देर रात किया गया गिरफ्तार

Satyakhabarindia

 

सत्य खबर हरियाणा

IDFC First Bank Scam : बहुचर्चित IDFC फर्स्ट बैंक फंड घोटाले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए IAS अधिकारी प्रदीप कुमार डागर को गिरफ्तार कर लिया। CBI ने बड़ी कार्रवाई करते हुए IDFC बैंक के एरिया हेड और AU बैंक के एक ब्रांच मैनेजर को भी गिरफ्तार किया है। CBI की विशेष कोर्ट ने दोनों बैंक अधिकारियों को 3 दिन की सीबीआई रिमांड पर भेज दिया है। सीबीआई आईएएस अधिकारी को आज कोर्ट में पेश करेगी।

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CBI ने आईएएस अधिकारी पर सरकारी धन के गबन में सीधे तौर पर संलिप्त होने का आरोप लगाया है। सरकार ने उन्हें 8 अप्रैल 2026 को ही सस्पेंड कर दिया था। उस समय वे हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) में सदस्य सचिव थे।

CBI के मुताबिक प्रदीप लंबे समय से जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे। इसके अलावा जांच एजेंसी से बचने की कोशिश कर रहे थे। उनकी लोकेशन ट्रेस करने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया है। खास बात ये है कि प्रदीप का आज रिटायरमेंट था। मगर, गिरफ्तारी के डर से वे अंडरग्राउंड थे। उन्होंने अग्रिम जमानत याचिका भी लगाई थी, जिस पर 2 जुलाई को सुनवाई होनी थी, लेकिन उससे पहले ही प्रदीप डागर गिरफ्तार हो गए।

बता दें कि अब तक इस मामले में प्रदीप डागर को मिलाकर तीन आईएएस अरेस्ट हो चुके है। इससे पहले आईएएस आरके सिंह और पंकज अग्रवाल की गिरफ्तारी हुई थी।

इससे पहले सीबीआई ने दो बैंक अधिकारियों आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में कैशियर चरणजीत सिंह रंधावा और एयू स्मॉल बैंक में डाटा एंट्री क्लर्क मोहम्मद शमीमदार को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया है।

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CBI की जांच के अनुसार दोनों बैंक अधिकारियों की भूमिका सरकारी विभागों के खातों के संचालन और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन में अहम मानी जा रही है।

एजेंसी का कहना है कि इन अधिकारियों से पूछताछ के दौरान फर्जी दस्तावेजों, अवैध ट्रांजैक्शन और अन्य आरोपियों के साथ कथित मिलीभगत से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिलने की उम्मीद है।

CBI का दावा है कि हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों के खातों से करोड़ों रुपये की अनियमित निकासी और ट्रांसफर सुनियोजित तरीके से किए गए थे। बताया जा रहा है कि गिरफ्तार किए गए दोनों बैंक अधिकारियों की भूमिका सरकारी खातों के संचालन, फर्जी बैंकिंग दस्तावेजों के इस्तेमाल और संदिग्ध फंड ट्रांसफर की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण रही है।

CBI अब रिमांड के दौरान दोनों से आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करेगी, ताकि पूरे नेटवर्क और घोटाले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाया जा सके।

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